🌞 सूर्य = पिता | 🌙 चंद्रमा = माता
जब प्रकृति भी माता-पिता बनकर हमारा जीवन चला रही है
सूर्य और चंद्रमा बिना रुके, बिना थके, बिना छुट्टी लिए हर मनुष्य, हर जीव-जंतु और पूरे संसार के जीवन को नियमित समय पर ऊर्जा, शांति और संरक्षण प्रदान कर रहे हैं।
लेकिन एक गहरा सवाल ❓
क्या हम कभी सूर्य और चंद्रमा को “धन्यवाद” कहते हैं?
यही तो कहानी है कलयुग की…
आज बिल्कुल यही स्थिति माता-पिता के साथ हो रही है।
👩🍼 माता – एक ऐसा बैंक
जहाँ हम बेझिझक:
- अपने दुख जमा करते हैं
- अपनी थकान उतारते हैं
- अपने आंसू सुरक्षित रखते हैं
- अपनी भावनाओं का overdraft लेते रहते हैं
लेकिन सवाल वही है 👉 क्या हम कभी उस बैंक में “खुशी” भी जमा करते हैं?
👨🦳 पिता – एक ऐसा क्रेडिट कार्ड
जिसके पास:
- खुद के लिए बैलेंस नहीं
- खुद के सपनों की EMI बाकी
- खुद की इच्छाएँ हमेशा pending
फिर भी… औलाद के सपनों को पूरा करने की limit कभी खत्म नहीं होती।
सूर्य-चंद्रमा की तरह माता-पिता
माता-पिता भी:
- बिना शिकायत
- बिना शोर
- बिना अपेक्षा
अपना कर्तव्य निभाते रहते हैं।
और हम? उपयोग तो करते हैं… लेकिन आभार भूल जाते हैं।
🙏 एक अंतिम सत्य
अगर आज भी आपके माता-पिता जीवित हैं,
तो समझ लीजिए —
✔️ जीवन का सबसे बड़ा बैंक अभी भी खुला है
✔️ सबसे भरोसेमंद क्रेडिट कार्ड आज भी active है
क्योंकि समय पर “धन्यवाद” न कहा जाए,
तो बाद में पछतावे का ब्याज बहुत भारी पड़ता है।
🙏 आज ही माता-पिता को धन्यवाद कहिए
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